पदच्छेदः
| तस्मिंस्तु | तद् (७.१)–तु (अव्ययः) |
| तमसा | तमस् (३.१) |
| नद्धे | नद्ध (√नह् + क्त, ७.१) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| ते | तद् (१.३) |
| देवराक्षसाः | देव–राक्षस (१.३) |
| अन्योन्यं | अन्योन्य (२.१) |
| नाभ्यजानन्त | न (अव्ययः)–अभ्यजानन्त (√अभि-ज्ञा लङ् प्र.पु. बहु.) |
| युध्यमानाः | युध्यमान (√युध् + शानच्, १.३) |
| परस्परम् | परस्पर (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्मिं | स्तु | त | म | सा | न | द्धे |
| स | र्वे | ते | दे | व | रा | क्ष | साः |
| अ | न्यो | न्यं | ना | भ्य | जा | न | न्त |
| यु | ध्य | मा | नाः | प | र | स्प | रम् |