पदच्छेदः
| काले | काल (७.१) |
| काले | काल (७.१) |
| विनीतात्मा | विनीत (√वि-नी + क्त)–आत्मन् (१.१) |
| पुष्पकेण | पुष्पक (३.१) |
| धनेश्वरः | धनेश्वर (१.१) |
| अभ्यगच्छत् | अभ्यगच्छत् (√अभि-गम् लङ् प्र.पु. एक.) |
| सुसंहृष्टः | सु (अव्ययः)–संहृष्ट (√सम्-हृष् + क्त, १.१) |
| पितरं | पितृ (२.१) |
| मातरं | मातृ (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| सः | तद् (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| का | ले | का | ले | वि | नी | ता | त्मा |
| पु | ष्प | के | ण | ध | ने | श्व | रः |
| अ | भ्य | ग | च्छ | त्सु | सं | हृ | ष्टः |
| पि | त | रं | मा | त | रं | च | सः |