पदच्छेदः
| तस्मिञ् | तद् (७.१) |
| जाते | जात (√जन् + क्त, ७.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| संहृष्टः | संहृष्ट (√सम्-हृष् + क्त, १.१) |
| स | तद् (१.१) |
| बभूव | बभूव (√भू लिट् प्र.पु. एक.) |
| पितामहः | पितामह (१.१) |
| नाम | नामन् (२.१) |
| चास्याकरोत् | च (अव्ययः)–इदम् (६.१)–अकरोत् (√कृ लङ् प्र.पु. एक.) |
| प्रीतः | प्रीत (√प्री + क्त, १.१) |
| सार्धं | सार्धम् (अव्ययः) |
| देवर्षिभिस्तदा | देव–ऋषि (३.३)–तदा (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्मि | ञ्जा | ते | तु | सं | हृ | ष्टः |
| स | ब | भू | व | पि | ता | म | हः |
| ना | म | चा | स्या | क | रो | त्प्री | तः |
| सा | र्धं | दे | व | र्षि | भि | स्त | दा |