पदच्छेदः
| ममेष्टं | मद् (६.१)–इष्ट (√इष् + क्त, १.१) |
| नित्यशो | नित्यशस् (अव्ययः) |
| देव | देव (८.१) |
| हव्यैः | हव्य (३.३) |
| सम्पूज्य | सम्पूज्य (√सम्-पूजय् + ल्यप्) |
| पावकम् | पावक (२.१) |
| संग्रामम् | संग्राम (२.१) |
| अवतर्तुं | अवतर्तुम् (√अव-तृ + तुमुन्) |
| वै | वै (अव्ययः) |
| शत्रुनिर्जयकाङ्क्षिणः | शत्रु–निर्जय–काङ्क्षिन् (६.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| म | मे | ष्टं | नि | त्य | शो | दे | व |
| ह | व्यैः | सं | पू | ज्य | पा | व | कम् |
| सं | ग्रा | म | म | व | त | र्तुं | वै |
| श | त्रु | नि | र्ज | य | का | ङ्क्षि | णः |