M N Dutt
Having created that female I was thinking, O king of the celestials! O foremost of the deities!, on whom I should confer her.
पदच्छेदः
| निर्मितायां | निर्मित (√निः-मा + क्त, ७.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| देवेन्द्र | देव–इन्द्र (८.१) |
| तस्यां | तद् (७.१) |
| नार्यां | नारी (७.१) |
| सुरर्षभ | सुरर्षभ (८.१) |
| भविष्यतीति | भविष्यति (√भू लृट् प्र.पु. एक.)–इति (अव्ययः) |
| कस्यैषा | क (६.१)–एतद् (१.१) |
| मम | मद् (६.१) |
| चिन्ता | चिन्ता (१.१) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| ऽभवत् | अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| नि | र्मि | ता | यां | तु | दे | वे | न्द्र |
| त | स्यां | ना | र्यां | सु | र | र्ष | भ |
| भ | वि | ष्य | ती | ति | क | स्यै | षा |
| म | म | चि | न्ता | त | तो | ऽभ | वत् |