पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| क्रुद्धेन | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, ३.१) |
| तेनासि | तद् (३.१)–असि (√अस् लट् म.पु. ) |
| शप्तः | शप्त (√शप् + क्त, १.१) |
| परमतेजसा | परम–तेजस् (३.१) |
| गतो | गत (√गम् + क्त, १.१) |
| ऽसि | असि (√अस् लट् म.पु. ) |
| येन | येन (अव्ययः) |
| देवेन्द्र | देव–इन्द्र (८.१) |
| दशाभागविपर्ययम् | दशा–भाग–विपर्यय (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तः | क्रु | द्धे | न | ते | ना | सि |
| श | प्तः | प | र | म | ते | ज | सा |
| ग | तो | ऽसि | ये | न | दे | वे | न्द्र |
| द | शा | भा | ग | वि | प | र्य | यम् |