पदच्छेदः
| तत् | तद् (२.१) |
| स्मर | स्मर (√स्मृ लोट् म.पु. ) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| महाबाहो | महत्–बाहु (८.१) |
| दुष्कृतं | दुष्कृत (१.१) |
| यत् | यद् (१.१) |
| त्वया | त्वद् (३.१) |
| कृतम् | कृत (√कृ + क्त, १.१) |
| येन | यद् (३.१) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| ग्रहणं | ग्रहण (२.१) |
| शत्रोर् | शत्रु (६.१) |
| गतो | गत (√गम् + क्त, १.१) |
| नान्येन | न (अव्ययः)–अन्य (३.१) |
| वासव | वासव (८.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | त्स्म | र | त्वं | म | हा | बा | हो |
| दु | ष्कृ | तं | य | त्त्व | या | कृ | तम् |
| ये | न | त्वं | ग्र | ह | णं | श | त्रो |
| र्ग | तो | ना | न्ये | न | वा | स | व |