M N Dutt
Beholding that dreadful spectacle, the Rākṣasas-Śuka and Sāraṇa came back and approaching Rāvaņa communicated (all) to him.
पदच्छेदः
| तम् | तद् (२.१) |
| अद्भुततमं | अद्भुततम (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| राक्षसौ | राक्षस (१.२) |
| शुकसारणौ | शुक–सारण (१.२) |
| संनिवृत्तावुपागम्य | संनिवृत्त (√संनि-वृत् + क्त, १.२)–उपागम्य (√उपा-गम् + ल्यप्) |
| रावणं | रावण (२.१) |
| तम् | तद् (२.१) |
| अथोचतुः | अथ (अव्ययः)–ऊचतुः (√वच् लिट् प्र.पु. द्वि.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | म | द्भु | त | त | मं | दृ | ष्ट्वा |
| रा | क्ष | सौ | शु | क | सा | र | णौ |
| सं | नि | वृ | त्ता | वु | पा | ग | म्य |
| रा | व | णं | त | म | थो | च | तुः |