M N Dutt
Being obstructed by the arms of Kārtavīryarjuna and having flooded the banks with her pure waters, Narmadā flowed in an opposite direction.
पदच्छेदः
| कार्तवीर्यभुजासेतुं | कार्तवीर्य–भुजा–सेतु (२.१) |
| तज्जलं | तद् (१.१)–जल (१.१) |
| प्राप्य | प्राप्य (√प्र-आप् + ल्यप्) |
| निर्मलम् | निर्मल (१.१) |
| कूलापहारं | कूल–अपहार (२.१) |
| कुर्वाणं | कुर्वाण (√कृ + शानच्, १.१) |
| प्रतिस्रोतः | प्रतिस्रोतस् (अव्ययः) |
| प्रधावति | प्रधावति (√प्र-धाव् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| का | र्त | वी | र्य | भु | जा | से | तुं |
| त | ज्ज | लं | प्रा | प्य | नि | र्म | लम् |
| कू | ला | प | हा | रं | कु | र्वा | णं |
| प्र | ति | स्रो | तः | प्र | धा | व | ति |