M N Dutt
Regaining his sense and beholding Rāvana bound, Prahasta, in great anger, pursued, the King of Haihaya.
पदच्छेदः
| प्रहस्तस्तु | प्रहस्त (१.१)–तु (अव्ययः) |
| समाश्वस्तो | समाश्वस्त (√समा-श्वस् + क्त, १.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| बद्धं | बद्ध (√बन्ध् + क्त, २.१) |
| दशाननम् | दशानन (२.१) |
| सह | सह (अव्ययः) |
| तै | तद् (३.३) |
| राक्षसैः | राक्षस (३.३) |
| क्रुद्धो | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| ऽभिदुद्राव | अभिदुद्राव (√अभि-द्रु लिट् प्र.पु. एक.) |
| पार्थिवम् | पार्थिव (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प्र | ह | स्त | स्तु | स | मा | श्व | स्तो |
| दृ | ष्ट्वा | ब | द्धं | द | शा | न | नम् |
| स | ह | तै | रा | क | सैः | क्रु | द्ध |
| अ | भि | दु | द्रा | व | पा | र्थि | वम् |