M N Dutt
And being released by the influence of Pulastya, the highly powerful Daśānana, the king of Raksasas, accepted his hospitality and being embraced by him, returned home ashamed.
पदच्छेदः
| पुलस्त्येनापि | पुलस्त्य (३.१)–अपि (अव्ययः) |
| संगम्य | संगम्य (√सम्-गम् + ल्यप्) |
| राक्षसेन्द्रः | राक्षस–इन्द्र (१.१) |
| प्रतापवान् | प्रतापवत् (१.१) |
| परिष्वङ्गकृतातिथ्यो | परिष्वङ्ग–कृत (√कृ + क्त)–आतिथ्य (१.१) |
| लज्जमानो | लज्जमान (√लज्ज् + शानच्, १.१) |
| विसर्जितः | विसर्जित (√वि-सर्जय् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| पु | ल | स्त्ये | ना | पि | सं | ग | म्य |
| रा | क्ष | से | न्द्रः | प्र | ता | प | वान् |
| प | रि | ष्व | ङ्ग | कृ | ता | ति | थ्यो |
| ल | ज्ज | मा | नो | वि | स | र्जि | तः |