M N Dutt
And beholding the ascetic resembling the rising sun arrived, the King Arjuna bowed to him reverentially like Indra saluting Mahadeva.
पदच्छेदः
| ततस्तम् | ततस् (अव्ययः)–तद् (२.१) |
| ऋषिम् | ऋषि (२.१) |
| आयान्तम् | आयान्त् (√आ-या + शतृ, २.१) |
| उद्यन्तम् | उद्यत् (√उत्-इ + शतृ, २.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| भास्करम् | भास्कर (२.१) |
| अर्जुनो | अर्जुन (१.१) |
| दृश्य | दृश्य (√दृश् + क्त्वा) |
| सम्प्राप्तं | सम्प्राप्त (√सम्प्र-आप् + क्त, २.१) |
| ववन्देन्द्र | ववन्द (√वन्द् लिट् प्र.पु. एक.)–इन्द्र (१.१) |
| इवेश्वरम् | इव (अव्ययः)–ईश्वर (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | त | स्त | मृ | षि | मा | या | न्त |
| मु | द्य | न्त | मि | व | भा | स्क | रम् |
| अ | र्जु | नो | दृ | श्य | सं | प्रा | प्तं |
| व | व | न्दे | न्द्र | इ | वे | श्व | रम् |