M N Dutt
Everyone will behold the enemy Rāvana, under my arm pit as a serpent possessed by Garuda, with his thighs, arms and clothes loosened.
पदच्छेदः
| द्रक्ष्यन्त्यरिं | द्रक्ष्यन्ति (√दृश् लृट् प्र.पु. बहु.)–अरि (२.१) |
| ममाङ्कस्थं | मद् (६.१)–अङ्क–स्थ (२.१) |
| स्रंसितोरुकराम्बरम् | स्रंसित (√स्रंसय् + क्त)–ऊरु–कर–अम्बर (२.१) |
| लम्बमानं | लम्बमान (√लम्ब् + शानच्, २.१) |
| दशग्रीवं | दशग्रीव (२.१) |
| गरुडस्येव | गरुड (६.१)–इव (अव्ययः) |
| पन्नगम् | पन्नग (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| द्र | क्ष्य | न्त्य | रिं | म | मा | ङ्क | स्थं |
| स्रं | सि | तो | रु | क | रा | म्ब | रम् |
| ल | म्ब | मा | नं | द | श | ग्री | वं |
| ग | रु | ड | स्ये | व | प | न्न | गम् |