M N Dutt
Thereupon the king of monkeys and the lord of Rākşasas, proud of strength, essayed to catch one another.पदच्छेदः
| तावन्योन्यं | तद् (१.२)–अन्योन्य (२.१) |
| जिघृक्षन्तौ | जिघृक्षत् (१.२) |
| हरिराक्षसपार्थिवौ | हरि–राक्षस–पार्थिव (१.२) |
| प्रयत्नवन्तौ | प्रयत्नवत् (१.२) |
| तत् | तद् (२.१) |
| कर्म | कर्मन् (२.१) |
| ईहतुर् | ईहतुः (√ईह् लिट् प्र.पु. द्वि.) |
| बलदर्पितौ | बल–दर्पित (√दर्पय् + क्त, १.२) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | व | न्यो | न्यं | जि | घृ | क्ष | न्तौ |
| ह | रि | रा | क्ष | स | पा | र्थि | वौ |
| प्र | य | त्न | व | न्तौ | त | त्क | र्म |
| ई | ह | तु | र्ब | ल | द | र्पि | तौ |