M N Dutt
Getting hold of Rāvana, the lord of Rākşasas, desirous of catching him, (Vāli) and placing him under his arm-pit Vāli vehemently rose high up in the welkin.
पदच्छेदः
| ग्रहीतुकामं | ग्रहीतु–काम (२.१) |
| तं | तद् (२.१) |
| गृह्य | गृह्य (√ग्रह् + क्त्वा) |
| रक्षसाम् | रक्षस् (६.३) |
| ईश्वरं | ईश्वर (२.१) |
| हरिः | हरि (१.१) |
| खम् | ख (२.१) |
| उत्पपात | उत्पपात (√उत्-पत् लिट् प्र.पु. एक.) |
| वेगेन | वेग (३.१) |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ + क्त्वा) |
| कक्षावलम्बिनम् | कक्ष–अवलम्बिन् (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ग्र | ही | तु | का | मं | तं | गृ | ह्य |
| र | क्ष | सा | मी | श्व | रं | ह | रिः |
| ख | मु | त्प | पा | त | वे | गे | न |
| कृ | त्वा | क | क्षा | व | ल | म्बि | नम् |