M N Dutt
And he went away carrying him, scratching him again and again with his snails like to winds scattering clouds.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तं | तद् (२.१) |
| पीडयमानस्तु | पीडयमान (√पीडय् + शानच्, १.१)–तु (अव्ययः) |
| वितुदन्तं | वितुदत् (√वि-तुद् + शतृ, २.१) |
| नखैर् | नख (३.३) |
| मुहुः | मुहुर् (अव्ययः) |
| जहार | जहार (√हृ लिट् प्र.पु. एक.) |
| रावणं | रावण (२.१) |
| वाली | वालिन् (१.१) |
| पवनस्तोयदं | पवन (१.१)–तोयद (२.१) |
| यथा | यथा (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | तं | पी | ड्द | य | मा | न | स्तु |
| वि | तु | द | न्तं | न | खै | र्मु | हुः |
| ज | हा | र | रा | व | णं | वा | ली |
| प | व | न | स्तो | य | दं | य | था |