M N Dutt
The Rākşasas could not catch Vāli but were rather exhausted by the stroke of his arms and thighs.
पदच्छेदः
| ते | तद् (१.३) |
| ऽशक्नुवन्तः | अशक्नुवत् (१.३) |
| सम्प्राप्तं | सम्प्राप्त (√सम्प्र-आप् + क्त, २.१) |
| वालिनं | वालिन् (२.१) |
| राक्षसोत्तमाः | राक्षस–उत्तम (१.३) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| बाहूरुवेगेन | बाहु–ऊरु–वेग (३.१) |
| परिश्रान्तः | परिश्रान्त (√परि-श्रम् + क्त, १.१) |
| पतन्ति | पतन्ति (√पत् लट् प्र.पु. बहु.) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ते | ऽश | क्नु | व | न्तः | सं | प्रा | प्तं |
| वा | लि | नं | रा | क्ष | सो | त्त | माः |
| त | स्य | बा | हू | रु | वे | गे | न |
| प | रि | श्रा | न्तः | प | त | न्ति | च |