M N Dutt
Thereupon holding each other by the arms they entered the city of Kiskindha like to two lions, entering delightedly a cave.
पदच्छेदः
| अन्योन्यं | अन्योन्य (२.१) |
| लम्बितकरौ | लम्बित (√लम्ब् + क्त)–कर (१.२) |
| ततस्तौ | ततस् (अव्ययः)–तद् (१.२) |
| हरिराक्षसौ | हरि–राक्षस (१.२) |
| किष्किन्धां | किष्किन्धा (२.१) |
| विशतुर् | विशतुः (√विश् लिट् प्र.पु. द्वि.) |
| हृष्टौ | हृष्ट (√हृष् + क्त, १.२) |
| सिंहौ | सिंह (१.२) |
| गिरिगुहाम् | गिरि–गुहा (२.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | न्यो | न्यं | ल | म्बि | त | क | रौ |
| त | त | स्तौ | ह | रि | रा | क्ष | सौ |
| कि | ष्कि | न्धां | वि | श | तु | र्हृ | ष्टौ |
| सिं | हौ | गि | रि | गु | हा | मि | व |