पदच्छेदः
| इन्द्रः | इन्द्र (१.१) |
| करीन्द्रम् | करीन्द्र (२.१) |
| आरुह्य | आरुह्य (√आ-रुह् + ल्यप्) |
| राहुं | राहु (२.१) |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ + क्त्वा) |
| पुरःसरम् | पुरःसर (२.१) |
| प्रायाद् | प्रायात् (√प्र-या लङ् प्र.पु. एक.) |
| यत्राभवत् | यत्र (अव्ययः)–अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
| सूर्यः | सूर्य (१.१) |
| सहानेन | सह (अव्ययः)–इदम् (३.१) |
| हनूमता | हनुमन्त् (३.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| इ | न्द्रः | क | री | न्द्र | मा | रु | ह्य |
| रा | हुं | कृ | त्वा | पु | रः | स | रम् |
| प्रा | या | द्य | त्रा | भ | व | त्सू | र्यः |
| स | हा | ने | न | ह | नू | म | ता |