M N Dutt
Preserving the bodies, the wind, having no persons, passes through them all. Without wind the body becomes like wood.पदच्छेदः
| अशरीरः | अशरीर (१.१) |
| शरीरेषु | शरीर (७.३) |
| वायुश्चरति | वायु (१.१)–चरति (√चर् लट् प्र.पु. एक.) |
| पालयन् | पालयत् (√पालय् + शतृ, १.१) |
| शरीरं | शरीर (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| विना | विना (अव्ययः) |
| वायुं | वायु (२.१) |
| समतां | सम–ता (२.१) |
| याति | याति (√या लट् प्र.पु. एक.) |
| रेणुभिः | रेणु (३.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | श | री | रः | श | री | रे | षु |
| वा | यु | श्च | र | ति | पा | ल | यन् |
| श | री | रं | हि | वि | ना | वा | युं |
| स | म | तां | या | ति | रे | णु | भिः |