M N Dutt
The Vāyu also brought his son at his house. He went out having told Añjanā about it all.
पदच्छेदः
| सो | तद् (१.१) |
| ऽपि | अपि (अव्ययः) |
| गन्धवहः | गन्धवह (१.१) |
| पुत्रं | पुत्र (२.१) |
| प्रगृह्य | प्रगृह्य (√प्र-ग्रह् + ल्यप्) |
| गृहम् | गृह (२.१) |
| आनयत् | आनयत् (√आ-नी लङ् प्र.पु. एक.) |
| अञ्जनायास्तम् | अञ्जना (६.१)–तद् (२.१) |
| आख्याय | आख्याय (√आ-ख्या + ल्यप्) |
| वरं | वर (२.१) |
| दत्तं | दत्त (√दा + क्त, २.१) |
| विनिःसृतः | विनिःसृत (√विनिः-सृ + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| सो | ऽपि | ग | न्ध | व | हः | पु | त्रं |
| प्र | गृ | ह्य | गृ | ह | मा | न | यत् |
| अ | ञ्ज | ना | या | स्त | मा | ख्या | य |
| व | रं | द | त्तं | वि | निः | सृ | तः |