M N Dutt
Saying this, Rama, the descendant of Kākutstha rose up from his seat and embraced him cordially.पदच्छेदः
| एतावद् | एतावत् (२.१) |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| उत्थाय | उत्थाय (√उत्-स्था + ल्यप्) |
| काकुत्स्थः | काकुत्स्थ (१.१) |
| परमासनात् | परम–आसन (५.१) |
| पर्यष्वजत | पर्यष्वजत (√परि-स्वज् लङ् प्र.पु. एक.) |
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) |
| निरन्तरम् | निरन्तरम् (अव्ययः) |
| उरोगतम् | उरस्–गत (√गम् + क्त, २.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | ता | व | दु | क्त्वा | उ | त्था | य |
| का | कु | त्स्थः | प | र | मा | स | नात् |
| प | र्य | ष्व | ज | त | ध | र्मा | त्मा |
| नि | र | न्त | र | मु | रो | ग | तम् |