M N Dutt
And my only request to you, O king, is that you may with love remember me and Sugriva. Do you now proceed, divested of sorrow.
पदच्छेदः
| अहं | मद् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| नित्यशो | नित्यशस् (अव्ययः) |
| राजन् | राजन् (८.१) |
| सुग्रीवसहितस्त्वया | सुग्रीव–सहित (१.१)–त्वद् (३.१) |
| स्मर्तव्यः | स्मर्तव्य (√स्मृ + कृत्, १.१) |
| परया | पर (३.१) |
| प्रीत्या | प्रीति (३.१) |
| गच्छ | गच्छ (√गम् लोट् म.पु. ) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| विगतज्वरः | विगत (√वि-गम् + क्त)–ज्वर (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | हं | च | नि | त्य | शो | रा | ज |
| न्सु | ग्री | व | स | हि | त | स्त्व | या |
| स्म | र्त | व्यः | प | र | या | प्री | त्या |
| ग | च्छ | त्वं | वि | ग | त | ज्व | रः |