M N Dutt
Thereupon those creatures humbly presented themselves before the creator, saying, What shall we do? We are sore tried by hunger and thirst.
पदच्छेदः
| ते | तद् (१.३) |
| सत्त्वाः | सत्त्व (१.३) |
| सत्त्वकर्तारं | सत्त्व–कर्तृ (२.१) |
| विनीतवद् | विनीत (√वि-नी + क्त)–वत् (अव्ययः) |
| उपस्थिताः | उपस्थित (√उप-स्था + क्त, १.३) |
| किं | क (२.१) |
| कुर्म | कुर्मः (√कृ लट् उ.पु. द्वि.) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| भाषन्तः | भाषत् (√भाष् + शतृ, १.३) |
| क्षुत्पिपासाभयार्दिताः | क्षुध्–पिपासा–भय–अर्दित (√अर्दय् + क्त, १.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ते | स | त्त्वाः | स | त्त्व | क | र्ता | रं |
| वि | नी | त | व | दु | प | स्थि | ताः |
| किं | कु | र्म | इ | ति | भा | ष | न्तः |
| क्षु | त्पि | पा | सा | भ | या | र्दि | ताः |