M N Dutt
The lord of creatures, laughing, addressed them, saying, “You men, do you carefully guard this (water).”
पदच्छेदः
| प्रजापतिस्तु | प्रजापति (१.१)–तु (अव्ययः) |
| तान्याह | तद् (२.३)–आह (√अह् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सत्त्वानि | सत्त्व (२.३) |
| प्रहसन्न् | प्रहसत् (√प्र-हस् + शतृ, १.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| आभाष्य | आभाष्य (√आ-भाष् + ल्यप्) |
| वाचा | वाच् (३.१) |
| यत्नेन | यत्न (३.१) |
| रक्षध्वम् | रक्षध्वम् (√रक्ष् लोट् म.पु. द्वि.) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| मानदः | मानद (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| प्र | जा | प | ति | स्तु | ता | न्या | ह |
| स | त्त्वा | नि | प्र | ह | स | न्नि | व |
| आ | भा | ष्य | वा | चा | य | त्ने | न |
| र | क्ष | ध्व | मि | ति | मा | न | दः |