पदच्छेदः
| कारुण्यभावात् | कारुण्य–भाव (५.१) |
| पार्वत्या | पार्वती (६.१) |
| भवस्त्रिपुरहा | भव (१.१)–त्रिपुर–हन् (१.१) |
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| तं | तद् (२.१) |
| राक्षसात्मजं | राक्षस–आत्मजा (२.१) |
| चक्रे | चक्रे (√कृ लिट् प्र.पु. एक.) |
| मातुर् | मातृ (६.१) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| वयःसमम् | वयस्–सम (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| का | रु | ण्य | भा | वा | त्पा | र्व | त्या |
| भ | व | स्त्रि | पु | र | हा | त | तः |
| तं | रा | क्ष | सा | त्म | जं | च | क्रे |
| मा | तु | रे | व | व | यः | स | मम् |