श्रुत्वा तु वाक्यं काकुत्स्थः सर्वेषां समुदीरितम् ।
विसर्जयामास तदा सर्वांस्ताञ्शत्रुतापनः ॥
श्रुत्वा तु वाक्यं काकुत्स्थः सर्वेषां समुदीरितम् ।
विसर्जयामास तदा सर्वांस्ताञ्शत्रुतापनः ॥
M N Dutt
Thereupon lowering their heads and saluting him they all said to Rāghava, of a depressed mind-“For sooth, the subjects thus talk about.” Thereupon Kakutstha, the slayer of enemies, bearing all those words, dismissed his friends.पदच्छेदः
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| काकुत्स्थः | काकुत्स्थ (१.१) |
| सर्वेषां | सर्व (६.३) |
| समुदीरितम् | समुदीरित (√समुत्-ईरय् + क्त, २.१) |
| विसर्जयामास | विसर्जयामास (√वि-सर्जय् प्र.पु. एक.) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| सर्वांस्ताञ्शत्रुतापनः | सर्व (२.३)–तद् (२.३)–शत्रु–तापन (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्रु | त्वा | तु | वा | क्यं | का | कु | त्स्थः |
| स | र्वे | षां | स | मु | दी | रि | तम् |
| वि | स | र्ज | या | मा | स | त | दा |
| स | र्वां | स्ता | ञ्श | त्रु | ता | प | नः |