M N Dutt
Thereupon having embraced them with his arms he raised up the princes and pressed them to take their seats. Then he said.
पदच्छेदः
| तान् | तद् (२.३) |
| परिष्वज्य | परिष्वज्य (√परि-स्वज् + ल्यप्) |
| बाहुभ्याम् | बाहु (३.२) |
| उत्थाप्य | उत्थाप्य (√उत्-स्थापय् + ल्यप्) |
| च | च (अव्ययः) |
| महाभुजः | महत्–भुज (१.१) |
| आसनेष्वाध्वम् | आसन (७.३)–आध्वम् (√आस् लोट् म.पु. द्वि.) |
| इत्युक्त्वा | इति (अव्ययः)–उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| जगाद | जगाद (√गद् लिट् प्र.पु. एक.) |
| ह | ह (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ता | न्प | रि | ष्व | ज्य | बा | हु | भ्या |
| मु | त्था | प्य | च | म | हा | भु | जः |
| आ | स | ने | ष्वा | ध्व | मि | त्यु | क्त्वा |
| त | तो | वा | क्यं | ज | गा | द | ह |