M N Dutt
"You are mine all; you constitute my life; O princes, I am governing the kingdom gained by you; you are all learned, pious and intelligent. Do you follow the duties I point out."
पदच्छेदः
| भवन्तः | भवत् (१.३) |
| कृतशास्त्रार्था | कृत (√कृ + क्त)–शास्त्र–अर्थ (१.३) |
| बुद्धौ | बुद्धि (७.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| परिनिष्ठिताः | परिनिष्ठित (√परिनि-स्था + क्त, १.३) |
| सम्भूय | सम्भूय (√सम्-भू + ल्यप्) |
| च | च (अव्ययः) |
| मदर्थो | मद्–अर्थ (१.१) |
| ऽयम् | इदम् (१.१) |
| अन्वेष्टव्यो | अन्वेष्टव्य (√अनु-इष् + कृत्, १.१) |
| नरेश्वराः | नरेश्वर (८.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| भ | व | न्तः | कृ | त | शा | स्त्रा | र्था |
| बु | द्धौ | च | प | रि | नि | ष्ठि | ताः |
| सं | भू | य | च | म | द | र्थो | ऽय |
| म | न्वे | ष्ट | व्यो | न | रे | श्व | राः |