रामस्य भाषितं श्रुत्वा द्वाःस्थो मूर्ध्नि कृताञ्जलिः ।
लक्ष्मणस्य गृहं गत्वा प्रविवेशानिवारितः ॥
रामस्य भाषितं श्रुत्वा द्वाःस्थो मूर्ध्नि कृताञ्जलिः ।
लक्ष्मणस्य गृहं गत्वा प्रविवेशानिवारितः ॥
M N Dutt
Hearing the words of Rāma and placing his folded palms on his head the warder reached house of Lakşmaņa and unobstructed entered therein.पदच्छेदः
| रामस्य | राम (६.१) |
| भाषितं | भाषित (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| द्वाःस्थो | द्वार्–स्थ (१.१) |
| मूर्ध्नि | मूर्धन् (७.१) |
| कृताञ्जलिः | कृताञ्जलि (१.१) |
| लक्ष्मणस्य | लक्ष्मण (६.१) |
| गृहं | गृह (२.१) |
| गत्वा | गत्वा (√गम् + क्त्वा) |
| प्रविवेशानिवारितः | प्रविवेश (√प्र-विश् लिट् प्र.पु. एक.)–अनिवारित (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रा | म | स्य | भा | षि | तं | श्रु | त्वा |
| द्वाः | स्थो | मू | र्ध्नि | कृ | ता | ञ्ज | लिः |
| ल | क्ष्म | ण | स्य | गृ | हं | ग | त्वा |
| प्र | वि | वे | शा | नि | वा | रि | तः |