M N Dutt
My mind know Sītā as chaste for ever. So, at that time, I came back to Ayodhya with Sita.
पदच्छेदः
| अन्तरात्मा | अन्तरात्मन् (१.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| वेत्ति | वेत्ति (√विद् लट् प्र.पु. एक.) |
| सीतां | सीता (२.१) |
| शुद्धां | शुद्ध (√शुध् + क्त, २.१) |
| यशस्विनीम् | यशस्विन् (२.१) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| गृहीत्वा | गृहीत्वा (√ग्रह् + क्त्वा) |
| वैदेहीम् | वैदेही (२.१) |
| अयोध्याम् | अयोध्या (२.१) |
| अहम् | मद् (१.१) |
| आगतः | आगत (√आ-गम् + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| अ | न्त | रा | त्मा | च | मे | वे | त्ति |
| सी | तां | शु | द्धां | य | श | स्वि | नीम् |
| त | तो | गृ | ही | त्वा | वै | दे | ही |
| म | यो | ध्या | म | ह | मा | ग | तः |