पदच्छेदः
| पुरे | पुर (७.१) |
| जनपदे | जनपद (७.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| कुशलं | कुशल (१.१) |
| प्राणिनाम् | प्राणिन् (६.३) |
| अपि | अपि (अव्ययः) |
| इत्यञ्जलिकृता | इति (अव्ययः)–अञ्जलि–कृत (√कृ + क्त, १.१) |
| सीता | सीता (१.१) |
| देवता | देवता (२.३) |
| अभ्ययाचत | अभ्ययाचत (√अभि-याच् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| पु | रे | ज | न | प | दे | चै | व |
| कु | श | लं | प्रा | णि | ना | म | पि |
| इ | त्य | ञ्ज | लि | कृ | ता | सी | ता |
| दे | व | ता | अ | भ्य | या | च | त |