पदच्छेदः
| तस्यास्तद् | तद् (६.१)–तद् (२.१) |
| वचनं | वचन (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| प्रमृज्य | प्रमृज्य (√प्र-मृज् + ल्यप्) |
| नयने | नयन (२.२) |
| शुभे | शुभ (२.२) |
| तितीर्षुर् | तितीर्षु (१.१) |
| लक्ष्मणो | लक्ष्मण (१.१) |
| गङ्गां | गङ्गा (२.१) |
| शुभां | शुभ (२.१) |
| नावम् | नौ (२.१) |
| उपाहरत् | उपाहरत् (√उप-हृ लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्या | स्त | द्व | च | नं | श्रु | त्वा |
| प्र | मृ | ज्य | न | य | ने | शु | भे |
| ति | ती | र्षु | र्ल | क्ष्म | णो | ग | ङ्गां |
| शु | भां | ना | व | मु | पा | ह | रत् |