पदच्छेदः
| यथा | यथा (अव्ययः) |
| भ्रातृषु | भ्रातृ (७.३) |
| वर्तेथास्तथा | वर्तेथाः (√वृत् विधिलिङ् म.पु. )–तथा (अव्ययः) |
| पौरेषु | पौर (७.३) |
| नित्यदा | नित्यदा (अव्ययः) |
| परमो | परम (१.१) |
| ह्येष | हि (अव्ययः)–एतद् (१.१) |
| धर्मः | धर्म (१.१) |
| स्याद् | स्यात् (√अस् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| एषा | एतद् (१.१) |
| कीर्तिर् | कीर्ति (१.१) |
| अनुत्तमा | अनुत्तम (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | था | भ्रा | तृ | षु | व | र्ते | था |
| स्त | था | पौ | रे | षु | नि | त्य | दा |
| प | र | मो | ह्ये | ष | ध | र्मः | स्या |
| दे | षा | की | र्ति | र | नु | त्त | मा |