M N Dutt
O Saumitri, do you carry out the orders you have received. By renouncing this wretched wight do you satisfy the King's orders. But hear, what I say.
पदच्छेदः
| यथाज्ञां | यथा (अव्ययः)–आज्ञा (२.१) |
| कुरु | कुरु (√कृ लोट् म.पु. ) |
| सौमित्रे | सौमित्रि (८.१) |
| त्यज | त्यज (√त्यज् लोट् म.पु. ) |
| मां | मद् (२.१) |
| दुःखभागिनीम् | दुःख–भागिन् (२.१) |
| निदेशे | निदेश (७.१) |
| स्थीयतां | स्थीयताम् (√स्था प्र.पु. एक.) |
| राज्ञः | राजन् (५.१) |
| शृणु | शृणु (√श्रु लोट् म.पु. ) |
| चेदं | च (अव्ययः)–इदम् (२.१) |
| वचो | वचस् (२.१) |
| मम | मद् (६.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| य | था | ज्ञां | कु | रु | सौ | मि | त्रे |
| त्य | ज | मां | दुः | ख | भा | गि | नीम् |
| नि | दे | शे | स्थी | य | तां | रा | ज्ञः |
| शृ | णु | चे | दं | व | चो | म | म |