पदच्छेदः
| तं | तद् (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| मुनिम् | मुनि (२.१) |
| आयान्तं | आयान्त् (√आ-या + शतृ, २.१) |
| वैदेह्यानुगतं | वैदेही (३.१)–अनुगत (√अनु-गम् + क्त, २.१) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| उपाजग्मुर् | उपाजग्मुः (√उपा-गम् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| मुदा | मुद् (३.१) |
| युक्ता | युक्त (√युज् + क्त, १.३) |
| वचनं | वचन (२.१) |
| चेदम् | च (अव्ययः)–इदम् (२.१) |
| अब्रुवन् | अब्रुवन् (√ब्रू लङ् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तं | दृ | ष्ट्वा | मु | नि | मा | या | न्तं |
| वै | दे | ह्या | नु | ग | तं | त | दा |
| उ | पा | ज | ग्मु | र्मु | दा | यु | क्ता |
| व | च | नं | चे | द | म | ब्रु | वन् |