पदच्छेदः
| स्वागतं | स्वागत (१.१) |
| ते | त्वद् (४.१) |
| मुनिश्रेष्ठ | मुनि–श्रेष्ठ (८.१) |
| चिरस्यागमनं | चिरस्य (अव्ययः)–आगमन (१.१) |
| प्रभो | प्रभु (८.१) |
| अभिवादयामः | अभिवादयामः (√अभि-वादय् लट् उ.पु. द्वि.) |
| सर्वास्त्वाम् | सर्व (१.३)–त्वद् (२.१) |
| उच्यतां | उच्यताम् (√वच् प्र.पु. एक.) |
| किं | क (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| कुर्महे | कुर्महे (√कृ लट् उ.पु. द्वि.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्वा | ग | तं | ते | मु | नि | श्रे | ष्ठ | |
| चि | र | स्या | ग | म | नं | प्र | भो | |
| अ | भि | वा | द | या | मः | स | र्वा | |
| स्त्वा | मु | च्य | तां | किं | च | कु | र्म | हे |