M N Dutt
She is worthy of your reverence specially while such is order of mine-your preceptor. So. do you all, take care of her with great affection.
पदच्छेदः
| इमां | इदम् (२.१) |
| भवत्यः | भवत् (१.३) |
| पश्यन्तु | पश्यन्तु (√पश् लोट् प्र.पु. बहु.) |
| स्नेहेन | स्नेह (३.१) |
| परमेण | परम (३.१) |
| ह | ह (अव्ययः) |
| गौरवान्मम | गौरव (५.१)–मद् (६.१) |
| वाक्यस्य | वाक्य (६.१) |
| पूज्या | पूज्य (√पूजय् + कृत्, १.१) |
| वो | त्वद् (६.३) |
| ऽस्तु | अस्तु (√अस् लोट् प्र.पु. एक.) |
| विशेषतः | विशेषतः (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| इ | मां | भ | व | त्यः | प | श्य | न्तु |
| स्ने | हे | न | प | र | मे | ण | ह |
| गौ | र | वा | न्म | म | वा | क्य | स्य |
| पू | ज्या | वो | ऽस्तु | वि | शे | ष | तः |