M N Dutt
O gentle one, it is not proper by any means to falsify the words of the king Dasaratha. I shall always, very carefully, carry out his orders. It is not proper to reveal this mystery before you. Still I do so for your curiosity has been greatly excited.
पदच्छेदः
| तस्याहं | तद् (६.१)–मद् (१.१) |
| लोकपालस्य | लोकपाल (६.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| तत् | तद् (२.१) |
| सुसमाहितः | सु (अव्ययः)–समाहित (१.१) |
| नैव | न (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| जात्वनृतं | जातु (अव्ययः)–अनृत (२.१) |
| कुर्याम् | कुर्याम् (√कृ विधिलिङ् उ.पु. ) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| सौम्य | सौम्य (८.१) |
| दर्शनम् | दर्शन (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | स्या | हं | लो | क | पा | ल | स्य |
| वा | क्यं | त | त्सु | स | मा | हि | तः |
| नै | व | जा | त्व | नृ | तं | कु | र्या |
| मि | ति | मे | सौ | म्य | द | र्श | नम् |