स दृष्ट्वा सूर्यसंकाशं ज्वलन्तमिव तेजसा ।
उपविष्टं वसिष्ठस्य सव्ये पार्श्वे महामुनिम् ।
तौ मुनी तापसश्रेष्ठौ विनीतस्त्वभ्यवादयत् ॥
स दृष्ट्वा सूर्यसंकाशं ज्वलन्तमिव तेजसा ।
उपविष्टं वसिष्ठस्य सव्ये पार्श्वे महामुनिम् ।
तौ मुनी तापसश्रेष्ठौ विनीतस्त्वभ्यवादयत् ॥
M N Dutt
He saw the great ascetic Durbásā, burning like the sun in his effulgence, seated on the right hand side of Vasiștha. Thereupon he humbly saluted those two leading ascetics.पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| सूर्यसंकाशं | सूर्य–संकाश (२.१) |
| ज्वलन्तम् | ज्वलत् (√ज्वल् + शतृ, २.१) |
| इव | इव (अव्ययः) |
| तेजसा | तेजस् (३.१) |
| उपविष्टं | उपविष्ट (√उप-विश् + क्त, २.१) |
| वसिष्ठस्य | वसिष्ठ (६.१) |
| सव्ये | सव्य (७.१) |
| पार्श्वे | पार्श्व (७.१) |
| महामुनिम् | महत्–मुनि (२.१) |
| तौ | तद् (२.२) |
| मुनी | मुनि (२.२) |
| तापसश्रेष्ठौ | तापस–श्रेष्ठ (२.२) |
| विनीतस्त्वभ्यवादयत् | विनीत (√वि-नी + क्त, १.१)–तु (अव्ययः)–अभ्यवादयत् (√अभि-वादय् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | दृ | ष्ट्वा | सू | र्य | सं | का | शं | ज्व | ल | न्त | मि |
| व | ते | ज | सा | उ | प | वि | ष्टं | व | सि | ष्ठ | स्य |
| स | व्ये | पा | र्श्वे | म | हा | मु | निम् | तौ | मु | नी | ता |
| प | स | श्रे | ष्ठौ | वि | नी | त | स्त्व | भ्य | वा | द | यत् |