M N Dutt
When the sages had spoken thus, Käkutstha said: "O ascetics, tell me what is the work which I shall have to accomplish in your behalf. Your fear shall be removed."
पदच्छेदः
| ब्रुवद्भिर् | ब्रुवत् (√ब्रू + शतृ, ३.३) |
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| ऋषिभिः | ऋषि (३.३) |
| काकुत्स्थो | काकुत्स्थ (१.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| किं | क (१.१) |
| कार्यं | कार्य (√कृ + कृत्, १.१) |
| ब्रूत | ब्रूत (√ब्रू लोट् म.पु. द्वि.) |
| भवतां | भवत् (६.३) |
| भयं | भय (२.१) |
| नाशयितास्मि | नाशयितास्मि (√नाशय् लुट् उ.पु. ) |
| वः | त्वद् (६.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ब्रु | व | द्भि | रे | व | मृ | षि | भिः |
| का | कु | त्स्थो | वा | क्य | म | ब्र | वीत् |
| किं | का | र्यं | ब्रू | त | भ | व | तां |
| भ | यं | ना | श | यि | ता | स्मि | वः |