पदच्छेदः
| तत् | तद् (२.१) |
| संनिक्षिप्य | संनिक्षिप्य (√संनि-क्षिप् + ल्यप्) |
| भवने | भवन (७.१) |
| पूज्यमानं | पूज्यमान (√पूजय् + शानच्, २.१) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| दिशः | दिश् (२.३) |
| सर्वाः | सर्व (२.३) |
| समालोक्य | समालोक्य (√समा-लोकय् + ल्यप्) |
| प्राप्नोत्याहारम् | प्राप्नोति (√प्र-आप् लट् प्र.पु. एक.)–आहार (२.१) |
| आत्मनः | आत्मन् (६.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | त्सं | नि | क्षि | प्य | भ | व | ने |
| पू | ज्य | मा | नं | पु | नः | पु | नः |
| दि | शः | स | र्वाः | स | मा | लो | क्य |
| प्रा | प्नो | त्या | हा | र | मा | त्म | नः |