M N Dutt
Hearing the words of the Rākşasa in the guise of a Brāhmaṇa, the king ordered his expert cooks, saying.पदच्छेदः
| तच्छ्रुत्वा | तद् (२.१)–श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| व्याहृतं | व्याहृत (√व्या-हृ + क्त, २.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| रक्षसा | रक्षस् (३.१) |
| कामरूपिणा | कामरूपिन् (३.१) |
| भक्षसंस्कारकुशलम् | भक्ष–संस्कार–कुशल (२.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| पृथिवीपतिः | पृथिवीपति (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | च्छ्रु | त्वा | व्या | हृ | तं | वा | क्यं |
| र | क्ष | सा | का | म | रू | पि | णा |
| भ | क्ष | सं | स्का | र | कु | श | ल |
| मु | वा | च | पृ | थि | वी | प | तिः |