पदच्छेदः
| तच्छ्रुत्वा | तद् (२.१)–श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| पार्थिवेन्द्रस्य | पार्थिव–इन्द्र (६.१) |
| रक्षसा | रक्षस् (३.१) |
| विकृतं | विकृत (√वि-कृ + क्त, २.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| तत् | तद् (२.१) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| प्रोवाच | प्रोवाच (√प्र-वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| राजानं | राजन् (२.१) |
| वसिष्ठः | वसिष्ठ (१.१) |
| पुरुषर्षभम् | पुरुष–ऋषभ (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | च्छ्रु | ता | पा | र्थि | वे | न्द्र | स्य |
| र | क्ष | सा | वि | कृ | तं | च | तत् |
| पु | नः | प्रो | वा | च | रा | जा | नं |
| व | सि | ष्ठः | पु | रु | ष | र्ष | भम् |