M N Dutt
Hearing those words the highly effulgent Vālmīki went there and attained to great on beholding those two highly effulgent sons, resembling the newly risen sun and the celestials. Thereupon he made arrangements against the oppression of ghosts and goblins.
पदच्छेदः
| तेषां | तद् (६.३) |
| तद् | तद् (२.१) |
| वचनं | वचन (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| मुनिर् | मुनि (१.१) |
| हर्षम् | हर्ष (२.१) |
| उपागमत् | उपागमत् (√उप-गम् प्र.पु. एक.) |
| भूतघ्नीं | भूत–घ्न (२.१) |
| चाकरोत् | च (अव्ययः)–अकरोत् (√कृ लङ् प्र.पु. एक.) |
| ताभ्यां | तद् (३.२) |
| रक्षां | रक्षा (२.१) |
| रक्षोविनाशिनीम् | रक्षस्–विनाशिन् (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ते | षां | त | द्व | च | नं | श्रु | त्वा |
| मु | नि | र्ह | र्ष | मु | पा | ग | मत् |
| भू | त | घ्नीं | चा | क | रो | त्ता | भ्यां |
| र | क्षां | र | क्षो | वि | ना | शि | नीम् |