M N Dutt
Having received this counsel of Hara, they, rendering reverence to that enemy of Kāma, came the abode of Nārāyana and communicated everything to him.
पदच्छेदः
| हरान्नावाप्य | हर (५.१)–न (अव्ययः)–अवाप्य (√अव-आप् + ल्यप्) |
| ते | तद् (१.३) |
| कामं | काम (२.१) |
| कामारिम् | कामारि (२.१) |
| अभिवाद्य | अभिवाद्य (√अभि-वादय् + ल्यप्) |
| च | च (अव्ययः) |
| नारायणालयं | नारायण–आलय (२.१) |
| प्राप्तास्तस्मै | प्राप्त (√प्र-आप् + क्त, १.३)–तद् (४.१) |
| सर्वं | सर्व (२.१) |
| न्यवेदयन् | न्यवेदयन् (√नि-वेदय् लङ् प्र.पु. बहु.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ह | रा | न्ना | वा | प्य | ते | का | मं |
| का | मा | रि | म | भि | वा | द्य | च |
| ना | रा | य | णा | ल | यं | प्रा | प्ता |
| स्त | स्मै | स | र्वं | न्य | वे | द | यन् |