M N Dutt
Therefore, will we even avenge ourselves on the gods, from whom has sprung this wrong.
पदच्छेदः
| तस्माद् | तस्मात् (अव्ययः) |
| अद्य | अद्य (अव्ययः) |
| समुद्युक्ताः | समुद्युक्त (√समुद्-युज् + क्त, १.३) |
| सर्वसैन्यसमावृताः | सर्व–सैन्य–समावृत (√समा-वृ + क्त, १.३) |
| देवान् | देव (२.३) |
| एव | एव (अव्ययः) |
| जिघांसामो | जिघांसामः (√जिघांस् लट् उ.पु. द्वि.) |
| येभ्यो | यद् (५.३) |
| दोषः | दोष (१.१) |
| समुत्थितः | समुत्थित (√समुत्-स्था + क्त, १.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | स्मा | द | द्य | स | मु | द्यु | क्ताः |
| स | र्व | सै | न्य | स | मा | वृ | ताः |
| दे | वा | ने | व | जि | घां | सा | मो |
| ये | भ्यो | दो | षः | स | मु | त्थि | तः |