पदच्छेदः
| तान् | तद् (२.३) |
| अचिन्त्य | अचिन्त्य (अव्ययः) |
| महोत्पातान् | महत्–उत्पात (२.३) |
| राक्षसा | राक्षस (१.३) |
| बलगर्विताः | बल–गर्वित (१.३) |
| यन्त्येव | यन्ति (√इ लट् प्र.पु. बहु.)–एव (अव्ययः) |
| न | न (अव्ययः) |
| निवर्तन्ते | निवर्तन्ते (√नि-वृत् लट् प्र.पु. बहु.) |
| मृत्युपाशावपाशिताः | मृत्यु–पाश–अवपाशित (१.३) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | न | चि | न्त्य | म | हो | त्पा | ता |
| न्रा | क्ष | सा | ब | ल | ग | र्वि | ताः |
| य | न्त्ये | व | न | नि | व | र्त | न्ते |
| मृ | त्यु | पा | शा | व | पा | शि | ताः |