तस्य मे युद्धकामस्य द्वन्द्वयुद्धं प्रदीयताम् ।
शत्रुस्त्वं सर्वजीवानां न मे जीवन्गमिष्यसि ॥
तस्य मे युद्धकामस्य द्वन्द्वयुद्धं प्रदीयताम् ।
शत्रुस्त्वं सर्वजीवानां न मे जीवन्गमिष्यसि ॥
M N Dutt
I wish now to fight with you-do you enter into a dual conflict. You are the enemy of all animals. You shall not be able to survive at my hands.पदच्छेदः
| तस्य | तद् (६.१) |
| मे | मद् (६.१) |
| युद्धकामस्य | युद्ध–काम (६.१) |
| द्वन्द्वयुद्धं | द्वंद्व–युद्ध (१.१) |
| प्रदीयताम् | प्रदीयताम् (√प्र-दा प्र.पु. एक.) |
| शत्रुस्त्वं | शत्रु (१.१)–त्वद् (१.१) |
| सर्वजीवानां | सर्व–जीव (६.३) |
| न | न (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
| जीवन् | जीवत् (√जीव् + शतृ, १.१) |
| गमिष्यसि | गमिष्यसि (√गम् लृट् म.पु. ) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | स्य | मे | यु | द्ध | का | म | स्य |
| द्व | न्द्व | यु | द्धं | प्र | दी | य | ताम् |
| श | त्रु | स्त्वं | स | र्व | जी | वा | नां |
| न | मे | जी | व | न्ग | मि | ष्य | सि |