M N Dutt
It is out of hatred that I have tolerated the destruction of Rāvana's family and have pardoned you all.पदच्छेदः
| तच्च | तद् (१.१)–च (अव्ययः) |
| सर्वं | सर्व (१.१) |
| मया | मद् (३.१) |
| क्षान्तं | क्षान्त (√क्षम् + क्त, १.१) |
| रावणस्य | रावण (६.१) |
| कुलक्षयम् | कुल–क्षय (१.१) |
| अवज्ञां | अवज्ञा (२.१) |
| पुरतः | पुरतस् (अव्ययः) |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ + क्त्वा) |
| मया | मद् (३.१) |
| यूयं | त्वद् (१.३) |
| विशेषतः | विशेषतः (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | च्च | स | र्वं | म | या | क्षा | न्तं |
| रा | व | ण | स्य | कु | ल | क्ष | यम् |
| अ | व | ज्ञां | पु | र | तः | कृ | त्वा |
| म | या | यू | यं | वि | शे | ष | तः |